जैव ईधन विद्युत (Bio-fuel Electricity)

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जैव ईधन विद्युत (Bio-fuel Electricity)

  • वैश्विक रूप से उत्पादित जैव ईंधन को यदि विद्युत उत्पादन में प्रयोग किया जाए तो अधिक कुशलता से प्रयोग किया जा सकता है, अपेक्षाकृत एथेनॉल बनाने की तुलना में।
  • एक पर्यावरणवादी वैज्ञानिक “इलियट कैंपवैल” ने कहा है की यह भी एक कारण है कि मानव जाति को जैव ईंधन से तरल जैव ईंधन प्राप्त करने की तुलना में विद्युत उत्पादन दर ध्यान देना चाहिए।
  • क्योंकि जैव ईंधन से विद्युत में परिवर्तन कर प्रयोग करना अधिक लाभदायक प्रतीत होता है।
  • विद्युत उत्पादन का प्रयोग करने द्वारा ग्रीन हाउस गैसेस से उत्सर्जन में दोगुनी कमी आएगी।
  • औद्योगिक क्षेत्र में लकड़ी तथा कृषि अपशिष्ट को माप तथा विद्युत दोनों के उत्पादन हेतु जलाकर प्रयोग किया जा सकता है, आवासीय तथा व्यवसायिक क्षेत्र में उस्मा हेतु तथा विद्युत क्षेत्र में ऊर्जा उत्पादन हेतु बायोमास-biomass का प्रयोग किया जाता है।
  • प्राय: जैव ईंधन के अधिकतर प्रकारों का प्रयोग तेल, कोयला तथा गैस की भांति ही जलाकर विद्युत उत्पादन हेतु प्रयोग किया जाता है।
  • इस प्रकार जैव ईंधन का प्रयोग कर विद्युत उत्पादन करना भी कार्बन उत्सर्जित करता है, जिस प्रकार फॉसिल फ्यूल के द्वारा विद्युत उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन होता है, परंतु फिर भी जैव ईंधन के पक्षधर कहते हैं क्योंकि यह पुनरउत्पादित संसाधन है, जबकि पेट्रोलियम पुनरउत्पादन संसाधन नहीं है बल्कि सीमित मात्रा में उपलब्ध है।
  • साथ ही साथ पेड़ पौधों को उगाने से पूरे कार्बन चक्र में कमी आती है क्योंकि पेड़ पौधे की वृद्धि हेतु भोजन बनाने में कार्बन का प्रयोग कर वातावरण से कार्बन अवशोषित कर लेते हैं।

अवधारणा

  • जैव ईंधन विद्युत से पक्षधर यह भी मानते हैं कि प्राय: जैव ईंधन के स्रोत कूड़ा कचरा, मानव अपशिष्ट तथा बेकार वनस्पति तेल आदि होते हैं जो recyclable होते हैं तथा प्राय: भूमि पर अथवा भूमिगत रूप से सड़क निकलने के लिए छोड़ दिए जाते हैं।
  • यद्यपि यह विद्युत उत्पादन में पूरे तरीके से पर्यावरणीय विपुढ़ नहीं होता, परंतु फिर भी तेजी से समाप्त हो रहे हो fossil fuel की तुलना में जैव ईंधन द्वारा विद्युत बनाना अधिक लाभदायक होगा।
  • बायोडीजल तथा विद्युत उत्पादन करना एक नया तरीका है, जिसमें generator तथा turbines के प्रयोग द्वारा विद्युत उत्पादन किया जाता है।
  • यह प्रयोग उन क्षेत्रों में अधिक लोकप्रिय हो रहा है जहां विद्युत उत्पादन के पारंपरिक स्रोत बहुत प्रदूषण करते हैं अथवा जहां वह सरलता से उपलब्ध नहीं हो पाते।
  • जैव ईंधन तरल रूप में यातायात हेतु अघिक सस्ता भी रहता है।
  • अलास्का तथा हवाई क्षेत्र कच्चे तेल के एक प्रकार का प्रयोग विधि पादन हेतु करते हैं।
  • Switch grass , लकड़ी के चिप्स जैसे जैव ईंधन का प्रयोग विद्युत उत्पादन में करने से कार्बन उत्सर्जन का भंडार किया जा सकता है, क्योंकि यह विकल्प इथेनॉल को जलाने में उपलब्ध नहीं हो सकता।
  • कार्बन उत्सर्जन को पेड़ पौधे अपने जीवन काल में वृद्धि हेतु प्रयोग करके भी कम करते हैं।
  • सी. सी. एस. प्रौद्योगिकी (C.C.S technology)- Carbon capture sequestration- इसके द्वारा कार्बन को कैप्चर करके उसे भूमिगत करके भी कुल कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है।
  • इस प्रकार जैव ईंधन का प्रयोग विद्युत उत्पादन में अधिक पर्यावरण प्रतीत होता।

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